उपमुख्यमंत्री ने बलांगीर बरगढ़ महासमुंद डिवीजन के माओवादियों के लिए आडियो संदेश किया जारी*
*उपमुख्यमंत्री ने बलांगीर बरगढ़ महासमुंद डिवीजन के माओवादियों के लिए आडियो संदेश किया जारी*
*पुर्नवास करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी सरकार – उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा*
महासमुदाय *रायपुर, 23 फरवरी 2026/*महासमुदाय, 23/2 (संस्कृत मीडिया)- माओवादियों की ओडिसा राज्य कमेटी के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो सचिव विकास द्वारा उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के लिए जारी किए पत्र के संबंध में ऑडियो संदेश जारी किया है। अपने संदेश में विकास द्वारा बलांगीर बरगढ़ महासमुंद डिवीजन के पुनर्वास के निर्णय का उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कल मुझे पत्र प्राप्त हुआ है आप सभी 15 साथी मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं आप शीघ्र निर्णय लीजिए आप 02-03 मार्च तक आना चाहते हैं बिना किसी चिंता के आएं।
उनके द्वारा पत्र में कुछ चिंताएं व्यक्त की गयीं थी जिनका उन्होंने समाधान अपने सन्देश में किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण शब्द के स्थान पर हम सम्मानपूर्वक पुनर्वास प्रयोग करते हैं। मुख्यधारा में आते ही घर भेजने में अभी परिस्थितियां पूर्ण ठीक नहीं हुई हैं, घर पर जान का खतरा हो सकता है और लंबे समय तक जंगल में रहने के कारण आपके विभिन्न प्रकार के दस्तावेज, बैंक खाता नहीं होता है इन प्रक्रियाओं को भी पूर्ण करना आवश्यक है, मुख्यधारा में शामिल होने से पहले आपको विविध आजीविकामूलक कौशल सिखाने का भी एक प्रोग्राम सरकार द्वारा चलाया जा रहा है, जिसमें किसी को ड्राइवर तो किसी को मोबाइल रिपेयरिंग या मोबाइल ऑपरेट का कार्य सिखाया जा रहा है ताकि वे सम्मानपूर्वक आजीविका अर्जित कर सकें। कुछ लोगों को अक्षर ज्ञान की भी आवश्यकता है वह भी दिलाया जा रहा है।
उन्होंने पुनर्वास केंद्र के सम्बंध में उनके संशयों का जवाब देते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्र के अंदर कोई बंद जेल के जैसी व्यवस्था नहीं है यह एक खुला पुनर्वास केंद्र है जिसमें लोग आना-जाना सब कुछ करते हैं, इस पुनर्वास केंद्र से लोग रायपुर भी घूमने आते हैं। केंद्र में सुबह से शाम तक की प्रक्रिया बनी है, जिसमें खेलकूद, स्वास्थ्य परीक्षण सभी समाहित हैं। इसमें तीन-चार महीने का वक्त दिया गया है। वह पूरा करके गांव की स्थितियां सामान्य होते ही लौट सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट भेजने और कार्रवाई करने के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि शासन द्वारा पुनर्वासित लोगों पर चल रहे मुकदमों के समाधान के लिए मंत्रियों की एक उप समिति का गठन भी किया है, जिसमें सभी प्रकरणों में से संविधान और विधि के दायरे में किन-किन प्रकरणों को वापस लिया जा सकता है इसके लिए विचार किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की सरकार ने जंगल से पुनर्वास के साथ जेल से भी पुनर्वास का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया क्या होगी इस पर भी चिंतन जारी है। जेल से पुनर्वास का अर्थ है कि जेल से जमानत करवाकर के बाहर लाकर उन्हें पुनर्वास केंद्र में लाया जाएगा, उसके बाद उनकी सहमति से उनका पुर्नवास कराया जाएगा। उन्हें निश्चित समय के बाद अपने घर भेजा जाएगा।
उन्होंने पत्र में मीडिया के माध्यम से पुनर्वास की घोषणा के बाद भी एमएमसी के साथ मुठभेड़ पर स्पष्ट किया कि सर्चिंग दल अपने कार्य पर डंप सर्च ऑपरेशन पर निकली थी, जहां अकस्मात गलतफहमी के कारण फायरिंग की स्थिति बनी परन्तु इससे पहले तो अनेक मामलों में सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। उत्तर डिवीजन के सचिव रहे सतीश अपने साथ 210 लोगों को ले कर आये थे, कांकेर में 21 लोगों ने भी पुनर्वास किया, अभी केंद्रीय कमेटी सदस्य रामधेर मज्जी ने भी जब पुनर्वास किया तब भी सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी। कोई भी चिंता ना करें चाहे उड़ीसा पुलिस का अभियान हो या छत्तीसगढ़ का पुलिस का अभियान हो सभी को सूचना देकर आपकी अपेक्षा के अनुरूप ही सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि हिंसा का मार्ग छोड़ कर आप किस विचारधारा पर काम करते हैं आप संविधान के दायरे में रहते हुए कैसे काम करते हैं इसमें आप स्वतंत्र हैं। समाज के विकास के लिए आप अपनी विचारधारा के साथ कार्य कर सकते हैं। बस हथियार हाथ में होगा तो वह गैर कानूनी माना जाएगा, समाज की भलाई के लिए लोगों की भलाई के लिए संविधान सम्मत कार्य करते हैं तो उसमें किसी को कोई समस्या नहीं है। अगर आपके हाथ में हथियार है तब तक आप समाज से भी अलग है, संविधान से भी अलग है और तब तक आप शासन प्रशासन से भी अलग हैं।
उन्होंने पुनर्वास के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार आपका लाल कालीन बिछाकर स्वागत करने को तैयार है। उन्होंने मोबाइल नंबर 7646935894 जारी करते हुए कहा कि आप इस नम्बर पर कॉल कर सकते हैं, सूचना पर परिवहन के लिए बस की व्यवस्था भी की जा सकती है। आप संपर्क के लिए पत्रकार साथी, पुनर्वासित आपके साथी सागर, आईजी, महासमुंद पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं आपको सुरक्षित वापस लाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भी बड़ी स्पष्टता से इस बात को कहा है कि सारे ऐसे साथी जो पुनर्वास करना चाहते हैं मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं उनका लाल कालीन बिछाकर स्वागत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय स्वयं भी आदिवासी समाज से हैं और उन्होंने भी बड़ी स्पष्टता से इस बात के लिए कहा है मैं स्वयं इस बात की पूरी चिंता करूंगा कि आप सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें और आने के लिए आपकी सुविधा अनुसार उचित वाहन उपलब्ध हो जाए आने वाले समय में आप पूर्ण रूप से पुनर्वासित हो आपके गांव में आपकी खेती बाड़ी की उचित व्यवस्था हो, आपका सम्मान हो आने वाले समय में आप जनता के लिए अच्छा काम कर सकें।

उन्होंने पश्चिम सब जोनल ब्यूरो सचिव विकास का धन्यवाद करते हुए कहा कि आपने सभी को मुख्यधारा में लाने के लिए जो प्रयास किया वह सराहनीय है। सारे आपके डीवीसी सदस्य, तीनों एरिया कमेटी सदस्य, अन्य पार्टी सदस्य, जिसमें 14 लोग बस्तर एवं एक तेलंगाना के हैं सभी का स्वागत है आप अपने हथियार भी अवश्य लेकर आएं।
*ବଲାଙ୍ଗୀର ବରଗଡ଼ ମହାସମୁନ୍ଦ ଡିଭିଜନର ମାଓବାଦୀଙ୍କ ପାଇଁ ଉପମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଡିଓ ବାର୍ତ୍ତା ପ୍ରକାଶ*
*ପୁନଃବାସ କରୁଥିବା ଲୋକଙ୍କ ସୁରକ୍ଷା ସରକାର ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବେ – ଉପମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ଶର୍ମା*
ମହାସମୁନ୍ଦ, 23/2(ସଂସ୍କୃତି ମିଡ଼ିଆ )-ରାୟପୁର, ଫେବୃଆରୀ ୨୩, ୨୦୨୬/* ଓଡ଼ିଶା ରାଜ୍ୟ ମାଓ କମିଟିର ପଶ୍ଚିମ ଉପ-ଜୋନାଲ୍ ବ୍ୟୁରୋର ସଚିବ ବିକାଶଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଉପମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ବିଜୟ ଶର୍ମାଙ୍କୁ ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଥିବା ଚିଠି ସମ୍ପର୍କରେ ଏକ ଅଡିଓ ବାର୍ତ୍ତା ପ୍ରକାଶ କରାଯାଇଛି। ତାଙ୍କ ବାର୍ତ୍ତାରେ, ଉପମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ଶର୍ମା ବଲାଙ୍ଗୀର ବରଗଡ଼ ମହାସମୁନ୍ଦ ଡିଭିଜନର ପୁନର୍ବାସ ପାଇଁ ବିକାଶଙ୍କ ନିଷ୍ପତ୍ତିକୁ ସ୍ୱାଗତ କରିଛନ୍ତି। ସେ କହିଛନ୍ତି, “ମୁଁ ଗତକାଲି ଚିଠି ପାଇଲି। ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ୧୫ ଜଣ ମୁଖ୍ୟସ୍ରୋତରେ ସାମିଲ ହେବାକୁ ଚାହୁଁଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ଶୀଘ୍ର ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେବା ଉଚିତ। ଆପଣମାନେ ମାର୍ଚ୍ଚ ୨-୩ ସୁଦ୍ଧା ଆସିବାକୁ ଚାହାଁନ୍ତି। କୌଣସି ଚିନ୍ତା ନକରି ଆସନ୍ତୁ।”
ସେ ତାଙ୍କ ବାର୍ତ୍ତାରେ ସମ୍ବୋଧିତ ଚିଠିରେ କିଛି ଚିନ୍ତା ପ୍ରକାଶ କରିଥିଲେ। ସେ କହିଥିଲେ ଯେ “ଆତ୍ମସମର୍ପଣ” ଶବ୍ଦ ପରିବର୍ତ୍ତେ ଆମେ ସମ୍ମାନର ସହିତ “ପୁନଃବାସ” ବ୍ୟବହାର କରୁ। ମୁଖ୍ୟସ୍ରୋତରେ ପ୍ରବେଶ କରିବା ପରେ ତୁରନ୍ତ ଆପଣଙ୍କୁ ଘରକୁ ପଠାଇବା ପାଇଁ ପରିସ୍ଥିତି ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଉନ୍ନତ ହୋଇନାହିଁ। ଘରେ ଜୀବନ ବିପଦରେ ପଡ଼ିପାରେ, ଏବଂ ଜଙ୍ଗଲରେ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ରହିବା ଯୋଗୁଁ ଆପଣଙ୍କର ବିଭିନ୍ନ କାଗଜପତ୍ର କିମ୍ବା ବ୍ୟାଙ୍କ ଆକାଉଣ୍ଟ ନାହିଁ। ଏହି ପ୍ରକ୍ରିୟାଗୁଡ଼ିକ ସମାପ୍ତ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ମୁଖ୍ୟଧାରାରେ ସାମିଲ ହେବା ପୂର୍ବରୁ, ସରକାର ଆପଣଙ୍କୁ ବିଭିନ୍ନ ଜୀବିକା ନିର୍ବାହ କୌଶଳ ଶିଖାଇବା ପାଇଁ ଏକ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ମଧ୍ୟ ଚଲାଉଛି। କିଛିଙ୍କୁ ଡ୍ରାଇଭିଂ, ମୋବାଇଲ୍ ମରାମତି କିମ୍ବା ମୋବାଇଲ୍ ପରିଚାଳନା ଶିଖାଯାଉଛି ଯାହା ଦ୍ୱାରା ସେମାନେ ଏକ ସମ୍ମାନଜନକ ଜୀବନଯାପନ କରିପାରିବେ। କିଛିଙ୍କୁ ସାକ୍ଷରତା ତାଲିମ ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକ, ଯାହା ମଧ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରାଯାଉଛି।
ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ର ବିଷୟରେ ସେମାନଙ୍କର ଚିନ୍ତାର ଉତ୍ତର ଦେଇ ସେ କହିଥିଲେ ଯେ ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ର ଏକ ବନ୍ଦ ଜେଲ୍ ପରି ନୁହେଁ; ଏହା ଏକ ଖୋଲା ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ର ଯେଉଁଠାରେ ଲୋକମାନେ ସବୁକିଛି ପାଇଁ ଆସନ୍ତି ଏବଂ ଯାଆନ୍ତି। ଲୋକମାନେ ଏହି ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ରରୁ ରାୟପୁର ମଧ୍ୟ ଯାଆନ୍ତି। କେନ୍ଦ୍ରରେ ସକାଳରୁ ସନ୍ଧ୍ୟା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରକ୍ରିୟା ଅଛି, ଯେଉଁଥିରେ କ୍ରୀଡା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଯାଞ୍ଚ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ। ଏହାକୁ ତିନିରୁ ଚାରି ମାସର ସମୟ ଦିଆଯାଇଛି। ଏହା ସମାପ୍ତ କରିବା ପରେ, ପରିସ୍ଥିତି ସ୍ୱାଭାବିକ ହେବା ମାତ୍ରେ ସେମାନେ ଗାଁକୁ ଫେରିପାରିବେ। ସେମାନଙ୍କୁ କୋର୍ଟକୁ ପଠାଇବା ଏବଂ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ନେବା ପ୍ରଶ୍ନର ଉତ୍ତର ଦେଇ ସେ କହିଛନ୍ତି ଯେ ପୁନର୍ବାସିତ ବ୍ୟକ୍ତିମାନଙ୍କ ବିରୁଦ୍ଧରେ ଚାଲିଥିବା ମାମଲାଗୁଡ଼ିକର ସମାଧାନ ପାଇଁ ସରକାର ମନ୍ତ୍ରୀମାନଙ୍କର ଏକ ଉପ-ସମିତି ମଧ୍ୟ ଗଠନ କରିଛନ୍ତି। ସମ୍ବିଧାନ ଏବଂ ଆଇନ ପରିସର ମଧ୍ୟରେ କେଉଁ ମାମଲା ପ୍ରତ୍ୟାହାର କରାଯାଇପାରିବ ତାହା ବିଚାର କରାଯାଉଛି।
ଛତିଶଗଡ଼ ସରକାର ଜଙ୍ଗଲରୁ ପୁନର୍ବାସ ସହିତ ଜେଲରୁ ପୁନର୍ବାସ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଚେଷ୍ଟା କରୁଛି। ଏଥିପାଇଁ ଆଇନଗତ ପ୍ରକ୍ରିୟା ସମ୍ପର୍କରେ ଆଲୋଚନା ଚାଲିଛି। ଜେଲରୁ ପୁନର୍ବାସ ଅର୍ଥ ହେଉଛି ବ୍ୟକ୍ତିମାନଙ୍କୁ ଜାମିନରେ ମୁକ୍ତ କରି ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ରକୁ ଅଣାଯିବ। ଏହା ପରେ, ସେମାନଙ୍କ ସମ୍ମତିରେ ସେମାନଙ୍କୁ ପୁନର୍ବାସ କରାଯିବ। ଏକ ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ ସମୟ ପରେ ସେମାନଙ୍କୁ ଘରକୁ ପଠାଯିବ।
ଗଣମାଧ୍ୟମ ମାଧ୍ୟମରେ ପୁନର୍ବାସ ଘୋଷଣା ସତ୍ତ୍ୱେ, ସେ ଚିଠିରେ MMC ସହିତ ଏନକାଉଣ୍ଟର ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଥିଲେ। ସେ କହିଥିଲେ ଯେ ସନ୍ଧାନ ଦଳ ଏକ ଡମ୍ପ ସର୍ଚ୍ଚ ଅପରେସନରେ ଥିଲା, ଯେଉଁଠାରେ ଏକ ଭୁଲ ବୁଝାମଣା ଯୋଗୁଁ ଗୁଳିକାଣ୍ଡ ଘଟିଥିଲା। ତଥାପି, ସରକାର ପୂର୍ବ ଅନେକ ମାମଲାରେ ତାଙ୍କର ପ୍ରତିବଦ୍ଧତା ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଛନ୍ତି। ଉତ୍ତର ଡିଭିଜନର ସଚିବ ଥିବା ସତୀଶ ତାଙ୍କ ସହିତ 210 ଜଣଙ୍କୁ ଆଣିଥିଲେ। କାଙ୍କେରରେ 21 ଜଣଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ପୁନର୍ବାସ କରାଯାଇଥିଲା। ସମ୍ପ୍ରତି, ଯେତେବେଳେ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ କମିଟି ସଦସ୍ୟ ରାମଧେର ମାଜ୍ଜୀଙ୍କୁ ପୁନର୍ବାସ କରାଯାଇଥିଲା, ସୁରକ୍ଷା ସୁନିଶ୍ଚିତ କରାଯାଇଥିଲା। କେହି ଚିନ୍ତା କରିବା ଉଚିତ୍ ନୁହେଁ, ଏହା ଓଡ଼ିଶା ପୋଲିସ ଅପରେସନ ହେଉ କିମ୍ବା ଛତିଶଗଡ଼ ପୋଲିସ ଅପରେସନ, ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଜଣାଇବା ପରେ ଆପଣଙ୍କ ଆଶା ଅନୁଯାୟୀ ସୁରକ୍ଷା ସୁନିଶ୍ଚିତ କରାଯିବ।
ସେ କହିଛନ୍ତି ଯେ କେନ୍ଦ୍ର ଗୃହମନ୍ତ୍ରୀ ଅମିତ ଶାହ ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଛନ୍ତି ଯେ ହିଂସାର ପଥ ପରିତ୍ୟାଗ କରି, ଆପଣ ଆପଣଙ୍କର ବିଚାରଧାରା ଏବଂ ସମ୍ବିଧାନର ପରିସର ମଧ୍ୟରେ କିପରି କାମ କରିବେ ତାହା ବାଛିବାକୁ ମୁକ୍ତ। ଆପଣ ଆପଣଙ୍କର ବିଚାରଧାରା ଅନୁସାରେ ସମାଜର ବିକାଶ ପାଇଁ କାମ କରିପାରିବେ। ତଥାପି, ଯଦି ଆପଣ ଏକ ଅସ୍ତ୍ର ବହନ କରନ୍ତି, ତେବେ ଏହାକୁ ବେଆଇନ ବୋଲି ବିବେଚନା କରାଯିବ। ସମାଜର କଲ୍ୟାଣ ପାଇଁ ଏବଂ ସମ୍ବିଧାନ ଅନୁସାରେ କାମ କରିବାରେ କାହାର କୌଣସି ଅସୁବିଧା ନାହିଁ। ଯେପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆପଣ ଏକ ଅସ୍ତ୍ର ବହନ କରନ୍ତି, ଆପଣ ସମାଜରୁ ପୃଥକ, ସମ୍ବିଧାନରୁ ପୃଥକ ଏବଂ ସରକାର ଏବଂ ପ୍ରଶାସନରୁ ପୃଥକ।
ପୁନର୍ବାସ ନିଷ୍ପତ୍ତିକୁ ସ୍ୱାଗତ କରି ସେ କହିଛନ୍ତି ଯେ ସରକାର ଆପଣଙ୍କୁ ଲାଲ କାର୍ପେଟ ସହିତ ସ୍ୱାଗତ କରିବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ। ସେ ମୋବାଇଲ୍ ନମ୍ବର 7646935894 ଜାରି କରି କହିଛନ୍ତି ଯେ ଆପଣ ଏହି ନମ୍ବରରେ କଲ୍ କରିପାରିବେ ଏବଂ ସୂଚନା ପାଇବା ପରେ ବସ୍ ପରିବହନ ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇପାରିବ। ଅଧିକ ସୂଚନା ପାଇଁ, ଆପଣ ସାମ୍ବାଦିକ ସହକର୍ମୀ, ପୁନର୍ବାସିତ ସହକର୍ମୀ, ସାଗର ଆଇଜି ଏବଂ ମହାସମୁନ୍ଦ ପୋଲିସ ଅଧିକ୍ଷକଙ୍କ ସହିତ ଯୋଗାଯୋଗ କରିପାରିବେ। ସେମାନଙ୍କୁ ସୁରକ୍ଷିତ ଭାବରେ ଫେରାଇ ଅଣାଯିବ। କେନ୍ଦ୍ର ଗୃହମନ୍ତ୍ରୀ ଅମିତ ଶାହ ମଧ୍ୟ ସ୍ପଷ୍ଟ ଭାବରେ କହିଛନ୍ତି ଯେ ଯେଉଁମାନେ ପୁନର୍ବାସିତ ହେବାକୁ ଏବଂ ମୁଖ୍ୟସ୍ରୋତକୁ ଫେରିବାକୁ ଚାହାଁନ୍ତି ସେମାନଙ୍କୁ ଲାଲ କାର୍ପେଟ ସହିତ ସ୍ୱାଗତ କରାଯିବ।
ସେ ଆହୁରି କହିଛନ୍ତି ଯେ ଆମର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ବିଷ୍ଣୁଦେବ ସାଇ, ଯିଏ ନିଜେ ଆଦିବାସୀ ସମ୍ପ୍ରଦାୟର ସଦସ୍ୟ, ସେ ମଧ୍ୟ ସ୍ପଷ୍ଟ ଭାବରେ କହିଛନ୍ତି ଯେ ସେ ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ଭାବରେ ନିଶ୍ଚିତ କରିବେ ଯେ ଆପଣ ସୁରକ୍ଷିତ, ସୁସ୍ଥ ରହିବେ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ଯାତ୍ରା ପାଇଁ ଉପଯୁକ୍ତ ପରିବହନର ସୁବିଧା ପାଇବେ। ଭବିଷ୍ୟତରେ, ଆପଣଙ୍କୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ପୁନର୍ବାସିତ କରାଯିବ। ଆପଣଙ୍କ ଗାଁରେ ଆପଣଙ୍କ ଚାଷ ପାଇଁ ଉପଯୁକ୍ତ ବ୍ୟବସ୍ଥା ହେବ, ଆପଣଙ୍କୁ ସମ୍ମାନ କରାଯିବ ଏବଂ ଆପଣ ଭବିଷ୍ୟତରେ ଜନସାଧାରଣଙ୍କ ପାଇଁ ଭଲ କାମ କରିପାରିବେ।
ସେ ପଶ୍ଚିମ ଉପ-ଜୋନାଲ ବ୍ୟୁରୋ ସଚିବ ବିକାଶଙ୍କୁ ଧନ୍ୟବାଦ ଜଣାଇ କହିଛନ୍ତି ଯେ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମୁଖ୍ୟସ୍ରୋତକୁ ଫେରାଇ ଆଣିବା ପାଇଁ ସମସ୍ତଙ୍କ ଦ୍ୱାରା କରାଯାଇଥିବା ପ୍ରୟାସ ପ୍ରଶଂସନୀୟ। ଆପଣଙ୍କ ସମସ୍ତ DVC ସଦସ୍ୟ, ତିନି ଜଣ କ୍ଷେତ୍ର କମିଟି ସଦସ୍ୟ, ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଦଳୀୟ ସଦସ୍ୟ, 14 ଜଣ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ସାମିଲ କରିଛନ୍ତି।
